Thursday, February 28, 2008

चाँद - भाग 1

अंतहीन समुद्र
आँखें बंद
नीरव,शांत
पूनम की रात,
चंद्रिका से दीपित
कोमल गात!

लेटा समंदर,
थका-हारा सा!
हिलती लहरों पर चाँदनी का स्पर्श..
जैसे थपकी दे माँ
सो जा..
नींद की चौकीदारी,
आकाश में
चाँद की गश्त!

अचानक पवन गतिमान,
बादलों में छिपा चाँद
चौंका समंदर!
बैचैन घबराया सा
दौड़ पड़ा..
पथरीली ज़मीन पर
बदहवास हो कर
पागल..!

पैर छिल गये उसके,
लहूलुहान हो गया
कराहता रहा,
रोता रहा,
बड़ी देर तक
हिचकियाँ गूँजती रहीं
अनंत आकाश में..!
और फिर
सो गया वो
बिना थपकियों के
यूँ हीं..

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