Tuesday, May 15, 2007

1 comment:

चिराग जैन CHIRAG JAIN said...

उपमान और उपमेय के अंतर की अनुमोदना के लिए धन्यवाद!
कदाचित आप भी सृजन की इस वेदना को उतने ही निकट से अनुभूत करते हैं......

-चिराग जैन